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यहूदी, ईसाई, मुस्लिम एवं हिन्दू के साझा पूर्वज

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Historicity of the Garden of Eden

मेरे अध्ययन के अनुसार बाइबिल और कुरानिक धर्मों की उत्पत्ति सिंधु घाटी में हुई थी और मूसा ने मिस्र से नहीं, बल्कि सिंधु घाटी से पलायन (Exodus) का नेतृत्व किया था 1446 ईसा पूर्व के आसपास, जो पारंपरिक रूप से पलायन का समय माना जाता है। मिस्र में यहूदियों का कोई पुरातात्विक साक्ष्य नहीं है। इसके विपरीत सिंधु घाटी सभ्यता लगभग 1500 ईसा पूर्व के आसपास ध्वस्त हो गई थी जिसके कारण वहां के लोग सभी दिशाओं में फैल गए। इन लोगों में से कुछ पश्चिम एशिया गए और वही यहूदी बन गए। मूसा ने आदम, नूह और अब्राहम की यादें सिंधु घाटी से लीं और ये सभी व्यक्ति मूल रूप से सिंधु घाटी में रहते थे। इन यादों को बाइबिल में समाहित कर लिया गया। महाभारत के मौसल पर्व में उल्लेख है कि यादवों के आपसी संघर्ष के बाद कृष्ण एक अज्ञात देश के लिए रवाना हो गए। यह अज्ञात देश इसराइल था जिससे यह संकेत मिलता है कि कृष्ण ही मूसा थे।

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बाइबल के अब्राहम, कुरआन के इब्राहीम और हिन्दुओं के राम एक ही व्यक्ति थे.

Posted on January 27, 2024August 28, 2024 By ekishwar

हमारा मानना है कि बाइबल  के अब्राहम, कुरआन के इब्राहीम और हिन्दुओ के राम एक ही व्यक्ति थे.

हम रामायण और बाइबल के बीच अनावश्यक समानांतरता ढूंढते रहते है.

हमारे इस प्रस्ताव के विरुद्ध में प्रोफेसर सैम्युअल सैंडमेल,जो सोसाइटी ऑफ़ बिब्लिकल लिटरेचर के अध्यक्ष थे, उन्होंने 1961 में एक लेक्चर दिया था उसमे उन्होंने कहा कि समानांतरता के भूत बन गया है जिसको उन्होंने “पैरालेल्लोमेनिया” कहा. उनका कहना था शोधकर्ता विभिन्न घटनाओं के बीच अनावश्यक समानांतरता ढूंढते रहते है. उन्होंने शेष बल दिया कि यदि हम दो विवरणों के बीच समानांतरता दिखाते है तो हमे ध्यान उनके बीच जो अंतर हैं उनपर देना चाहिए. केवल यह कहना पर्याप्त नहीं है कि दो विवरण समानांतर है. हमे यह भी देखना होगा कि उनके बीच जो अंतर्विरोध है वह प्रभावी नहीं है.

इस दृष्टि से इब्राहीम और राम की कहानियों में दो प्रकार के अंतर है. एक प्रकार का अंतर है जिसमे दोनों विवरणों में अंतर्विरोध है. जैसे कि बाइबल में कहा गया कि इब्राहीम पशुपालक थे और रामायण में कहा गया कि राम राजा थे. दोनों विपरीत बातें कह रहें है. दूसरा अंतर है कि एक विवरण में कुछ बातें बताई गयी जोकि दुसरे विवरण में नहीं बताई गयी हैं जैसे बाइबल में जोसफ के फिरौन के घर की बातें हैं. हिन्दू पुस्तकों में इनका विवरण नहीं है. इसमें अंतर्विरोध पैदा नहीं होता है.

बाइबल और रामायण नॉरमैंडी के बारे में लिखने वाले इतिहासकारों की तरह हैं

बाइबल और रामायण  पर्ल हार्बर के बारे में लिखने वाले इतिहासकारों की तरह हैं

जैसे मान लीजिए द्वितीय विश्व युद्ध के बारे में दो इतिहासकार लिख रहें हैं. एक इतिहासकार ने नोरमैंडी पर अमेरिकी सेना की लैंडिंग के बारे में लिखा तो दुसरे ने जापान के पर्ल हार्बर पर हवाई हमले पर लिखा. इससे यह नहीं साबित होता है कि दोनों विवरण एक दुसरे के विरोध में हैं. दोनों विवरण एक ही बड़ी घटना के दो हिस्से थे. एक इतिहासकार ने नोरमैंडी पर विवरण किया और दुसरे इतिहासकार ने पर्ल हार्बर पर विवरण किया. दोनों विवरण आपस में मेल खाते हैं. इसलिए हमे देखना होगा कि जो अंतर हमे दीखते है वे वास्तव में अंतर्विरोध है या वह आपस में सामंजस्य बैठा लेते हैं.

हम इस दृष्टी से इब्राहीम और राम की कहानी पर विचार करते हैं. रामायण में बताया गया कि भगवान राम के पूर्वज इक्षुमती नाम के स्थान पर रहते थे. रामायण यह नहीं बताती कि इक्षुमती से अयोध्या वह परिवार कब और किन परिस्थितियों में आया.

उर चाल्डिया और इक्षुमती नामो का सामंजस्य बैठता है

बाइबल में बताया गया कि इब्राहीम के पिता तेरह उर चाल्डिया नाम के स्थान से चले और इब्राहीम आई नाम के स्थान पर आकर बसे. उर चाल्डिया और इक्षुमती नामो का सामंजस्य बैठता है जैसा आप इस चित्र में देख सकते हैं. अतः दोनों विवरणों में उर चाल्डिया अथवा इक्षुमती से चलकर आई अथवा अयोध्या में बसना प्रमाणित होता है.

इब्राहीम एक शक्तिशाली चरवाहा था, जबकि राम राजा थे.

इब्राहीम एक शक्तिशाली चरवाहा था, जबकि राम राजा थे

एक अंतर है कि बाइबल में इब्राहीम को पशुपालक बताया गया. उनके पास बड़ी संख्या में ऊंट, गाय, इत्यादि थे. जबकि हिन्दू शास्त्रों में राम को राजा बताया गया है.

ऋषि विश्वामित्र द्वारा दक्षिण में ले जाए जा रहे इब्राहीम-राम पर बाइबल मौन है

सारा-सीता को दक्षिण से लौटते समय इब्राहीम-राम से शादी करने पर बाइबल मौन है

इसके बाद विश्वामित्र जी राम को लेकर दक्षिण में गए. वहां उन्होंने कुछ राक्षसों का वध किया. उसके बाद वे राम को लेकर जनकपुरी गए. वहां उनका सीता से विवाह हुआ और वे वापस अयोध्या आये. बाइबल इस पूरे प्रकरण पर मौन है. अतः इसमें कोई अंतर्विरोध नहीं बनता.

इसके बाद बाइबल के अनुसार आई में भीषण अकाल पड़ा जिसके कारण इब्राहीम ने दक्षिण जाने का निर्णय लिया. इसके विपरीत वाल्मीकि रामायण के अनुसार राम के पिता दशरथ ने अपनी पत्नी कैकेयी को वर दे रखा था और कैकेयी ने उस वर को माँगा और कहा कि राम को चौदह वर्ष के लिए वनवास भेज दिया जाए. दोनों शास्त्रों में राम दक्षिण दिशा में गये थे.

इब्राहीम,सारा और लोट दक्षिण की ओर जाते हुए

राम, सीता और लक्ष्मण दक्षिण की ओर जाते हुए

यह एक अंतर है कि बाइबल के अनुसार दक्षिण जाते समय इब्राहीम के साथ उनकी पत्नी सारा और उनके भतीजे लोट गए. जबकि रामायण के अनुसार राम के साथ उनकी पत्नी सीता और उनके छोटे भाई लक्ष्मण गए. यहाँ भी समानांतरता दिखती है.

इसके बाद वाल्मीकि रामायण बड़े विस्तार से बताती है कि राम ने विराध और अन्य राक्षसों का वध किया, अगस्त्य आदि मुनियों के घर गए, और पंचवटी में रुके. बाइबल इस विवरण पर मौन है.

सारा को फिरौन के महल में ले जाया गया

सीता का अपहरण रावण द्वारा किया गया

दक्षिण में सूर्पनखा पंचवटी आई. उन्होंने राम और लक्ष्मण से विवाह करने का प्रस्ताव दिया. मना किए जाने पर वह रावण के पास गई और रावण को उकसाया. रावण ने पंचवटी आकर सीता का हरण किया. बाइबल की कहानी में यही बात दुसरे रूप में कही गयी है.जब इब्राहीम दक्षिण पहुचे, तो वहां के लोगों ने सारा को बहुत सुंदर पाया. वे उन्हें राजा फिरौन के घर ले गए. दोनों विवरणों में समानांतरता है कि पत्नी सारा अथवा सीता को दक्षिण के राजा के महल में ले जाया गया यद्यपि जिन घटनाओं के माध्यम से यह हुआ उसमे भेद है.

बाइबल के अनुसार दक्षिण के फिरौन के घर में उत्पात हुए जिनसे त्रस्त आकर फिरौन ने सारा को इब्राहीम को वापस कर दिया. किंग जेम्स बाइबल के अनुसार इस समय फिरौन ने कहा कि “मैने इसे छुआ नहीं है.”रामायण के अनुसार भी रावण ने सीता के साथ सहवास नहीं किया था. इसके बाद इब्राहीम सारा को लेकर वापस आई आ गए.

राम ने लंका पर आक्रमण करने के लिए समुद्र पर पुल बनाया

राम ने लंका पर आक्रमण कर रावण का वध किया

रामायण के अनुसार सीता के अपहरण के बाद राम ने कठोर परिश्रम किया. पहले सुग्रीव के साथ मैत्री की, फिर हनुमान को सीता को ढूंढने के लिए लंका भेजा,फिर समुद्र पर पुल बनाकर लंका पर आक्रमण किया, रावण का वध किया और सीता को लेकर पुष्पक विमान से वे वापस अयोध्या आये. यह लम्बी कहानी बाइबल में नही दी गयी है लेकिन दोनों में समानांतरता है कि दक्षिण के राजा को परेशानी हुई.

इस प्रकार हम देखते हैं कि अंतर मुख्यतः वह हैं जिनका वाल्मीकि रामायण में विस्तार से विवरण दिया गया है और जिनका बाइबल में विवरण उपलब्ध नहीं है: विश्वामित्र जी कि यात्रा,विराध आदि राक्षसों का वध, दक्षिण में लंका पर आक्रमण और पुष्पक विमान से वापस आने का विवरण नहीं है.इस मौनता सेअंतर्विरोध पैदा नहीं होता है.

बाइबल और रामायण के विवरणों में अंतर सूक्ष्म है. पहला अंतर दो भाई और एक भतीजे बनाम तीन भाइयों का है. दूसरा अंतर इब्राहीम के पशुपालक होने का है. तीसरा अंतर बाइबल में आकाल का विवरण है जबकि रामायण में राजमहल के षड्यंत्र का विवरण है. यह अंतर गंभीर नहीं हैं. यदि हम रामायण की कहानी को बाइबल में लगा दे अथवा बाइबल की कहानी को रामायण में लगा दे अंतर्विरोध पैदा नहीं होता है. इसलिए मेरा यह मानना है की यह एक ही घटना के दो अलग-अलग विवरण है.

फ्रायड ने कहा कि सामूहिक यादें सामाजिक अचेतन में रहती हैं

फ्रायड ने कहा कि समाज व्यक्ति की तरह अचेतन यादें रखते हैं

महान मनोवैज्ञानिक सिगमंड फ्रायड ने कहा है कि जिस प्रकार किसी व्यक्ति के अचेतन में पुरानी घटनाओं की यादें सुस्त पड़ी रहती हैं और बाद में प्रकट हो जाती हैं उसी प्रकार सामाजिक स्तर पर जो पुरानी घटनाएं हैं वह सामाजिक अचेतन में रहती हैं और दिव्य लोग इस अचेतन में से उनघटनाओं को पुनः निकाल सकते है

मूसा ने अचेतन में से कुछ विवरणों को निकाला

वाल्मीकि महर्षि ने उसी अचेतन से अलग विवरणों को निकाला.

हजारो वर्षों बाद मूसा ने उस अचेतन में से कुछ विवरणों को निकाला और वाल्मीकि महर्षि ने उसी अचेतन से अलग विवरणों को निकाला. इस प्रकार एक ही घटना के आज दो अलग-अलग विवरण उपलब्ध हैं. दोनों विवरणों में तमाम समानांतर घटनाओं को देखते हुए हमे विचार करना चाहिए क्या यह एक ही व्यक्ति हो सकते हैं? क्या इस एक ही व्यक्ति की सिख के आधार पर हम अब्रहमिक और हिन्दू धर्म के बीच में नए स्तर का वार्तालाप स्थापित कर सकते हैं?

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