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यहूदी, ईसाई, मुस्लिम एवं हिन्दू के साझा पूर्वज

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Historicity of the Garden of Eden

मेरे अध्ययन के अनुसार बाइबिल और कुरानिक धर्मों की उत्पत्ति सिंधु घाटी में हुई थी और मूसा ने मिस्र से नहीं, बल्कि सिंधु घाटी से पलायन (Exodus) का नेतृत्व किया था 1446 ईसा पूर्व के आसपास, जो पारंपरिक रूप से पलायन का समय माना जाता है। मिस्र में यहूदियों का कोई पुरातात्विक साक्ष्य नहीं है। इसके विपरीत सिंधु घाटी सभ्यता लगभग 1500 ईसा पूर्व के आसपास ध्वस्त हो गई थी जिसके कारण वहां के लोग सभी दिशाओं में फैल गए। इन लोगों में से कुछ पश्चिम एशिया गए और वही यहूदी बन गए। मूसा ने आदम, नूह और अब्राहम की यादें सिंधु घाटी से लीं और ये सभी व्यक्ति मूल रूप से सिंधु घाटी में रहते थे। इन यादों को बाइबिल में समाहित कर लिया गया। महाभारत के मौसल पर्व में उल्लेख है कि यादवों के आपसी संघर्ष के बाद कृष्ण एक अज्ञात देश के लिए रवाना हो गए। यह अज्ञात देश इसराइल था जिससे यह संकेत मिलता है कि कृष्ण ही मूसा थे।

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एडम और ईव के पाप?

Posted on January 26, 2024August 28, 2024 By ekishwar

अदम ने ट्री ऑफ नॉलेज नहीं खाया। तब भगवान ने उसे खाने के लिए प्रेरित करने के लिए उसे “नकारात्मक सुझाव” दिया। उसने तभी खाया जब शैतान ने उसे प्रेरित किया। तब उन्होंने कपड़े पहनना शुरू किया और इसके बाद जमीन…. पर खेती की.

बाइबिल तथा कुरान कहेते है कि भगवान ने अदम को जन्नत मे रखा और उन्हें मना किया कि  वह एक विशेष पोधे को ना खाए यह भी कहा कि यदि वो उस पोधे को खाते है तो उनकी मृत्यु हो जाएगी. अदम ने उस पोधे को इस मनाही के बावजूत भी खाया लेकिन वह मरे नही. इससे प्रमाणित होता है कि भगवान ने जो अदम को पोधा खाने से मना किया था उसका रहस्य कुछ और ही है क्युकी भगवान झूट नही बोलते. यदि भगवान ने कहा था कि पोधा खाने के बाद वे मर जायेगे. तो उने मर जाना चाहिए था इस रहस्य को समझने के लिए हमे कहानी के पीछे जाना होगा.

पहले भगवान ने अदम को जन्नत मे रखा यानि कि हम मान सकते है जन्नत मे जितने भी पोधे थे उनके बारे मे अदम को ज्ञान था और जो ये विशेष पोधा था ट्री ऑफ़ नोंलेज जिसे बाइबिल मे कहा गया यह भी उन्हें ज्ञान था ऐसा प्रतीत होता है कि इस जानकारी के बावजूत अदम ने उस पोधे को नही खाया और भगवान चाहते थे.

कि वो उस पोधे को खाए इसलिए भगवान ने उनको जो खाने के लिए मना किया वह एक नकारात्मक सुझाव की तरह होगा. जैसे माँ बच्चे को कभी – कभी नकारात्मक सुझाव देती है जैसे माँ यदि चाहती है कि बच्चा उस फल को खाए और वो नही खाता तो माँ कहेती है अगर इस फल को खाओगे तो तुमे नुकसान होगा तो उस बच्चे कि जिज्ञासा होती है और वह उस फल को खाये है इसी प्रकार संभव है कि भगवान ने अदम को मना किया होगा  कि तुम उस पोधे को मत खाओ जिससे कि प्रेरित होकर वह उस पोधे को खाये, फिर भी अदम ने नही खाया तब भगवान ने शैतान को कहा कि अदम को प्रेरित करे कि वह इस पोधे को खाए.

अत: अदम ने उस पोधे को खाया और उसको खाने के बाद उनकी आँखे खुल गए उन्होंने वस्त्र बनाये और उन्होंने खेती चालू की, यानि कि उस पोधे को खाने से  किसी प्रकार का कोई नकारात्मक प्रभाव नही पड़ा और उनकी भभूती बढी और वे आगे बढे और मानव समाज आगे बढ़ा इससे ये लगता है कि वह पोधा वास्तव मे अच्छा पोधा था और भगवान चाहते थे कि वो उस पोधे को खाए.

अब प्रश्न ये है इसके बाद अदम ने माफ़ी क्यों मागी क्युकी बाइबिल तथा कुरान कहेते है कि अदम ने उस पोधे वो खाने के लिए भगवान से माफ़ी मागी.

मेरा सुझाव ये है कि उन्होंने जो माफ़ी मागी वह पोधा खाने के लिए नही बल्कि पोधे को देर से खाने के लिए मागी होगी जैसे भगवान ने अदम को पहले जन्नत मे रखा था उनकी आशा थी कि वो उस पोधे को खाए लेकिन उन्होंने नही खाया और देर से खाया इस बात के लिए अदम ने भगवान से माफ़ी मागी होगी अब अगर हम ऐसा समझे तो फिर कहानी इस प्रकार बनती है कि भगवान ने अदम को जन्नत मे रखा उन्होंने उनसे अपेक्षा कि वो उस पोधे को खायेगे और वो मानव समाज को आगे बढायेगे उन्होंने उस पोधे को खाने मे देरी की इसलिए भगवान ने पहले नकारात्मक सुझाव दिया फिर शैतान ने उनको सुझाव दिया अत: अदम ने उस पोधे को खाया और मानव समाज का कल्याण हुआ और क्युकी उन्होंने देर से खाया था इसलिए उन्होंने उस देरी के कारण भगवान से माफ़ी मागी होगी ऐसा हम समझ सकते है.

 

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